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बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में पुस्तक "मेरा जीवन, अनुभूतियाँ और विचार" का हुआ लोकार्पण, हुई काव्य-प्रतियोगिता
बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में पुस्तक "मेरा जीवन, अनुभूतियाँ और विचार" का हुआ लोकार्पण, हुई काव्य-प्रतियोगिता
by
Arun Pandey,
September 12, 2026
in
बिहार
अभाव-ग्रस्त लोगों को प्रेरणा देती है न्यायमूर्त्ति मान्धाता सिंह की आत्म-कथा
पटना, १२ सितम्बर। अभाव, संघर्ष और श्रम की भट्ठी में तपकर निकले हुए व्यक्तियों का जीवन सुवर्ण सा चमकता हुआ दिखायी देता है। ऐसे ही व्यक्तियों की जीवनी प्रेरणा दायी होती है। पटना उच्च न्यायालय में न्यायाधीश और मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष रहे न्यायमूर्त्ति मान्धता सिंह का जीवन, ऐसी ही संघर्षपूर्ण और श्रमसाध्य उपलब्धियों से भरा है। शून्य से शिखर तक की उनकी जीवन-यात्रा, जीवनानुभूतियाँ और विचार अवश्य ही समाज के लिए प्रेरणास्पद है।
यह बातें शनिवार को बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में, सम्मेलन द्वारा प्रकाशित श्री सिंह की पुस्तक "मेरा जीवन, अनुभूतियाँ और विचार" का लोकार्पण करते हुए, सम्मेलन अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने कही। उन्होंने कहा कि गंगा के कटाव वाले एक सुदूर ग्राम में एक सीमांत किसान के पुत्र के रूप में जन्म लेने वाले लेखक ने खेतों में काम करते हुए अपनी पढ़ाई पूरी की। अपने गाँव के प्रथम स्नातक, अधिवक्ता और ज़िला न्यायालय से उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में, अपने कुल का गौरव बढ़ाया। रामचरित मानस से अनुप्राणित लेखक ने अपनी इस आत्मकथा में मानस के मर्म को भी समझने तथा समझाने की चेष्टा की है। यह पुस्तक पठनीय और अनुकरणीय है।
समारोह के मुख्य अतिथि और संस्कृत शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष मृत्युंजय झा ने पुस्तक के लिए लेखक को बधाई देते हुए कहा कि ऐसी ही पुस्तकें छात्र-छात्राओं को जीवन के संघर्षों से उबरने की शक्ति प्रदान करती हैं।
सुप्रसिद्ध लेखिका किरण सिंह ने कहा कि लेखक जो हमारे परिवार के सदस्य की तरह हैं, अपनी पुस्तक में अपने कठिन-काल के अनुभवों को एक न्यायाधीश की भाँति ही सत्य और निष्ठा से लिखा है। सत्यता और सरलता ही इस पुस्तक की विशेषता है।
वरिष्ठ साहित्यकार डा रत्नेश्वर सिंह, अवकाश प्राप्त अभियन्ता भोला सिंह, लेखक की धर्मपत्नी देवंती सिंह, कवयित्री आराधना प्रसाद तथा ईं अशोक कुमार ने भी अपने विचार व्यक्त किए। मंच का संचालन कवि ब्रह्मानन्द पाण्डेय ने तथा धन्यवाद-ज्ञापन कृष्ण रंजन सिंह ने किया।
इस अवसर पर लेखक के ज़िला-जज पुत्र माधवेंद्र सिंह, अधिवक्ता पुत्र राघवेंद्र सिंह तथा व्याख्याता पुत्र यादवेंद्र सिंह, पुत्र वधुएँ प्रियंका सिंह, शिल्पी कुमारी तथा डा ज्योति जी, आचार्य विजय गुंजन, प्रो सुनील कुमार उपाध्याय, लेखिका डा पुष्पा जमुआर, पं उमेश मिश्र, विभा रानी श्रीवास्तव, सिद्धेश्वर, चंदा मिश्र, डा मनोज गोवर्धनपुरी, शमा कौसर "शमा", नम्रता कुमारी, सुजाता मिश्र, डा करुणा पीटर, डा नागेश्वर प्रसाद यादव, बाँके बिहारी साव, इन्दु भूषण सहाय, हरेंद्र कुमार सिंह समेत बड़ी संख्या में सुधीजन की उपस्थिति थी।
आज विद्यार्थियों के लिए काव्य-पाठ-प्रतियोगिता भी आयोजित हुई, जिसमें डॉन बास्को अकादमी, दीघा, शिवम् कौंवेंट, न्यू बाइपास, पटना,किलकारी बिहार बाल भवन, सैदपुर, पटना, इंफ़ैंट जीसस स्कूल, पटना सिटी, संत जौंस पब्लिक हाई स्कूल, पार्करोड, कदमकुआँ, पटना,गोकुल जगत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, तरियानी, शिवहर, गंगस्थली, दीघा के ७० से अधिक विद्यार्थियों ने प्रतिभागिता दी।
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