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बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में लेखिका ज्योति झा की पुस्तक "स्पेक्ट्रम ऐंड बियोंड" का हुआ लोकार्पण, हुई लघुकथा-गोष्ठी
बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में लेखिका ज्योति झा की पुस्तक "स्पेक्ट्रम ऐंड बियोंड" का हुआ लोकार्पण, हुई लघुकथा-गोष्ठी
by
Arun Pandey,
April 16, 2026
in
बिहार
मस्तिष्क-दुर्बलता से पीड़ित बच्चों के प्रति गहन संवेदना है "स्पेक्ट्रम ऐंड बियोंड"
पटना, 16 अप्रैल। मस्तिष्क-दुर्बलता से पीड़ित बच्चों और उनके अभिभावकों के साथ गहरी संवेदना की अभिव्यक्ति है चर्चित लेखिका ज्योति झा की पुस्तक "स्पेक्ट्रम ऐंड बियोंड"। अंग्रेज़ी में आयी यह पुस्तक बच्चों में आ जाने वाली इस मस्तिष्क-दुर्बलता पर, जिसे अंग्रेज़ी में "ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम डिज़ौर्डर कहा जाता है, एक गहरी दृष्टि प्रदान करती है। लेखिका ने इस विषय पर गहरा अध्ययन और पीड़ित-बच्चों, उनके माता-पिता और उपचार करने वाले विशेषज्ञों के साथ साक्षात्कार कर पुस्तक के रूप में एक मार्ग-दर्शक दिया है, जो अस्वस्थ बच्चों के माता-पिता और समाज को संवेदनशील बनाता है। ऐसे बच्चों की भी परिवार और समाज में करुणा-पूरित स्वीकृति मिलनी चाहिए, ऐसा लेखिका का मत है।
यह बातें गुरुवार को "लेट्स इंस्पायर बिहार" की साहित्यिक शाखा के सौजन्य से बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में आयोजित पुस्तक-लोकार्पण समारोह और लघु कथा-गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए, सम्मेलन अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने कही। उन्होंने कहा कि ज्योति जी मानवीय संवेदना से परिपूर्ण एक प्रतिभाशाली लेखिका हैं। उनकी शोध-परक इस पुस्तक में समस्याग्रस्त अबोध बच्चों और समाज की पीड़ा की मर्म-स्पर्शी अभिव्यक्ति हुई है।
समारोह के मुख्य अतिथि भारतीय पुलिस सेवा के वरिष्ठ अधिकारी और "लेट्स इंस्पायर बिहार" के प्रणेता विकास वैभव ने कहा कि लोकार्पित पुस्तक की लेखिका ज्योति झा जी एक अत्यंत उत्साही, संवेदनशील और समाज की पीड़ा को शब्द देने वाली साहित्यकार हैं। इस पुस्तक में लेखिका ने ऑटिज़्म के संबंध में बहुत ही गहराई से शोध कर लिखा है। यह पुस्तक ऑटिज़्म से पीड़ित बच्चों के माता-पिता और उसकी देखभाल कारने वाले लोगों के लिए अत्यंत लाभकारी होगी।
चेन्नई से पधारे तमिल और हिन्दी के वरिष्ठ साहित्यकार डा गोविंद राजन बिहार राज्य बाल संरक्षण आयोग की पूर्व अध्यक्ष डा निशा मदन झा, युवा कवि अविनाश बंधु, "मदर्स टच", देवघर की संस्थापक-निदेशक डा रूपा श्री, किसलय किशोर तथा जयंती झा ने भी अपने विचार व्यक्त किए तथा लेखिका को बधाई दी।
इस अवसर पर आयोजित लघुकथा-गोष्ठी में डा पुष्पा जमुआर ने "प्रेम का सोता", विभारानी श्रीवास्तव ने "वसंत", शमा कौसर शमा ने दिखावा, डा मेहता नगेंद्र सिंह ने "नाम-करण", डा मीना परिहार ने हवा में गाँठ, कुमार अनुपम ने "दरिद्र भोज", अनीता मिश्र सिद्धि ने "सोच बदलो", अनुभा गुप्ता ने "दीमक", राजप्रिया रानी ने जली रोटी", ई अशोक कुमार ने "हिमालय दरक रहा है", डा सुषमा कुमारी ने आख़िरी-घंटी,तथा इन्दु भूषण सहाय ने राज दरबार शीर्षक से अपनी लघुकथा का पाठ किया।
इस अवसर पर कवयित्री नम्रता कुमारी, विंग कमांडर उमेंद्र त्रिपाठी, अभिषेक कुमार झा तथा बाल-साहित्यकार अनुनय मिश्र को सम्मानित किया गया। मंच का संचालन ब्रह्मानन्द पाण्डेय ने तथा धन्यवाद-ज्ञापन कृष्ण रंजन सिंह ने किया।
सम्मेलन के भवन अभिरक्षक प्रवीर कुमार पंकज, श्रद्धा कुमारी, हृदय प्रकाश, उमाकांत ओझा, नन्दन कुमार शंकर भगवान सिंह, राखी मंडल अरुण कुमार वर्मा आदि बड़ी संख्या में प्रबुद्ध श्रोता उपस्थित थे।
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