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क्या सशरीर उपस्थित हो विधानसभा या परिषद से इस्तीफा देने की कानूनी बाध्यता है?
क्या सशरीर उपस्थित हो विधानसभा या परिषद से इस्तीफा देने की कानूनी बाध्यता है?
by
Arun Pandey,
March 29, 2026
in
राजनीति
अरुण कुमार पाण्डेय
पटना,29 मार्च। राज्यसभा के लिए निर्वाचित भाजपाध्यक्ष नितिन नवीन विधानसभा से और और जदयू अध्यक्ष व सीएम
नीतीश कुमार विधान परिषद की सदस्यता छोडेंगे। यह इन दोनों के लिए संविधान और नियमों की बाध्यता है। ऐसा नहीं करने पर राज्यसभा से उनका निर्वाचन ही स्वत:निरस्त हो जायेगा। किसी के लिए दो सदनों का एकसाथ सदस्य रहने की कानूनी इजाजत नहीं है। 14 दिनों के अंदर किसी एक सदन से इस्तीफा देना ही है।
बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए 16 मार्च को चुनाव हुआ। केन्द्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर और उपेन्द्र कुशवाहा फिर निर्वाचित हो गये। नीतीश कुमार, नितिन नवीन और शिवेश राम पहली बार राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए। शिवेश पूर्व विधायक हैं।
इन सबों का कार्यकाल 10 फरवरी से शुरु होगा।
फिलहाल सबसे बडा सवाल है कि क्या इस्तीफा पत्र सौपने के लिए सीएम नीतीश कुमार को परिषद सभापति और भाजपाध्यक्ष नितिन नवीन को सदेह उपस्थित होने की कानूनी बाध्यता है? मेरी जानकारी में जरुरी नहीं है।हां इस्तीफा पत्र स्वलिखित होना चाहिए।
विधान सभा की प्रक्रिया एतथा कार्य संचालन नियमावली 65 में प्रवधान है कि सदस्य अपने हाथ से लिख कर विहार विधान सभा अध्यक्ष को सूचित करेंगे लेकन स्थान त्याग का कारण नहीं देंगे।
प्रारुप है: स्थान...तिथि....
मैं एसके द्वारा तिथि.....से सदन के अपने स्थान का त्याग करता हूं। विश्वासभाजन,सदस्य विधान सभा
अब यह सबों को जानना चाहिए कि सदेह उपस्थित होकर स्वलिखित त्याग पत्र देने की परंपरा का क्यों निर्वाह हो रहा है। इस मूल कारण है क्या कोई सदस्य किसी के दबाब में तो इस्तीफा तो नहीं दे रहा। ऐसी कोई परिस्थिति से बचने के लिए है सदेह उपस्थित हो इस्तीफा का प्रचलन है।वस्तुत:यह स्पीकर की भी संतुष्टि और भरोसे की भी बात है कोई सदस्य खुद की इच्छा से इस्तीफा दे रहा या किसी के दबाब में ?
लाख टके का सवाल है कि क्या सीएम नीतीश कुमार और भाजपाध्यक्ष नितिन नवीन किसी के दबाब में इस्तीफा देंगे? जबाब है ,कदापि नहीं। भला उन्हें इस्तीफा के लिए कोई दबाब दे सकता है? किसी के माध्यम से भी स्वलिखित इस्तीफा देंगे तो स्पीकर उसे स्वीकार कर सकते हैं।इसमें न तो कोई कानूनी अड़चन है और न बाध्यता। 16 मार्च को निर्वाचित इन दोनों राजनेताओं के विधानमंडल से 14वें दिन 30 मार्च को इस्तीफे का पटाक्षेप होगा।
रविवार को ही सियासी गलियारे में भाजपाध्यक्ष नितिन नवीन के विधानसभा से इस्तीफा की तैयारी का रोचक परिणाम सामने आया।विधानसभा सचिवालय से मीडिया को सूचना दी गयी कि नितिन नवीन 8.45 बजे स्पीकर को इस्तीफा देंगे। स्पीकर प्रम कुमार प्रदश भाजपाध्यक्ष संजय सरावगी की सूचना पर दिल्ली के पहले से तय कार्यक्रम छोडकर पटना आ गये। ऐनवक्त नितिन नवीन का विधानसभा से इस्तीफा का कार्यक्रम टल गया और चुनावी दौरे पर असम चले गये।
अब सोमवार को उनके स्पीकर के सामने आकर इस्तीफा देने का इंतजार होगा या नियम के तहत स्वलिखित पत्र पाकर स्पीकर उसे स्वीकार कर बांकीपुर विधानसभा सीट खाली करने की प्रक्रिया पूरी करेंगे। नितिन लगातार पांचवीं बार बांकीपुर से विधायक हैं ।सीट खाली होने पर उपचुनाव अवश्य॔भावी है ।18वीं विधानसभा चुनाव बाद यह प।ली सीट खाली होगी।
नीतीश कुमार ने 10वीं बार न सिर्फ सीएम बनने का इतिहास रचा है बल्कि सीएम बनने के बाद वे लगातार परिषद के ही सदस्य बनते रहे हैं। उनके लिए भी परिसभापति के समक्ष होकर इस्तीफा देने की कानूनी बाध्यता नहीं है।
हां यह तय कि 10 अप्रैल को या उसके बाद भी जब चाहें राज्यसभा के सदस्य के रूप शपथ ले सकते हैं और परिषद से इसतीफा के बाद भी छह महीने सीएम बने रह सकते हैं।परंतु काल और परिस्थिति की जिस मजबूरी से नीतीश कुमार ने पहली बार राज्यसभा जाने की ठानी है तो सीएम से पदत्याग को अधिक दिनों तक टालने की परिस्थिति नहीं दिखती। नीतीश कुमार के सीएम से पदत्याग के बाद न सिर्फ बिहार का राजनीतिक परिदृश्य बदलेगा बल्कि जदयू की सत्ता के अंत से उसके भविष्य को बचाना और संवार रखने की कठिन चुनौती होगी।
भाजपा के लिए भी पहली बार सत्ता में आने पर नीतीश कुमार की राजनीति,जनाधार,विकास की थारा और प्रदेश की ज्वलंत समस्यों से निजात दिलाने के साथ अपने कोर एजेंडा यथा कामन सिविल कोड लागू करना और सीमांचल में घुसपैठ की समस्या से निजात दिलाने की कठिन चुनौती अभी हो दिख रही है।
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