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नई दिल्ली,11 मार्च। लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर विपक्ष के हंगामेके बीच ध्वनि मत से खारिज हो गया।लोकसभा के इतिहास मे कांगेस द्वारा लोकसभाध्यक्ष की निष्ठाऔर निष्पक्षता पर सवाल उठा पेश अविश्वास प्रस्ताव परदो दिनों 13 घंटे की हुई चर्चा का गृह मंत्री अमित शाह से डेढ घंटे में जबाव दिया। विपक्ष के नेता राहुल गांधी को सदन में नहीं बोलने देने के मुख्य आरोप को लेकर विपक्ष की ओर से अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था।72 सासंदों ने चर्चा में भाग लिया।राहुल गांधी ने न तो प्रस्ताव प हस्ताक्षर किया और न चर्चा में भाग लिया। सरकार की ओर से जबाव के दौरान राहुल मौजूद रहे।पीठासीन सदस्य जगदम्ब्बा पाल ने कांग्रेस के मोहम्मद जावेद द्वारा पेश अविश्वास प्रस्ताव पर मत विभाजन कराने की घोषणा की और प्रस्ताव पेश नरने पर सहमति की अपेक्षा की। हंगामे के बीच प्रस्ताव पेश नहीं किये जाने पर मत से यह खारिज हो गया। गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ संकल्प लाने को लेकर विपक्ष पर निशाना साधते हुए बुधवार को कहा कि विपक्षी दलों ने बिरला की निष्ठा पर सवाल खड़े किए हैं, जो बहुत अफसोसजनक है. उन्होंने कहा कि किसी को भी नियम के विपरीत बोलने का अधिकार नहीं है। राहुल गांधी दावा करते हैं कि उन्हें सदन में बोलने नहीं दिया जाता, जबकि ‘‘वह खुद बोलना नहीं चाहते।’’ "विपक्ष जब अध्यक्ष की निष्ठा पर सवाल खड़ा करता है तो यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है और निंदनीय भी है. यह हमारी परंपरा, उच्च परंपराओं के निर्वहन में बहुत अफसोसजनक घटना है.’’इससे पहले भी 3 बार अध्यक्ष पर अविश्वास प्रस्ताव आए हैं, लेकिन ओम बिरला जी एकमात्र ऐसे स्पीकर हैं जिन्होंने नैतिक आधार पर, जब से यह प्रस्ताव नामित हुआ, तब से अध्यक्षता नहीं कीकेन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि 1954 में जी वी मावलंकर के खिलाफ सोशलिस्ट पार्टी अविश्वास प्रस्ताव लाई, 1966 में तत्कालीन लोक सभा स्पीकर सरदार हुकुम सिंह जी के खिलाफ संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी अविश्वास प्रस्ताव लाई और 1987 में श्री बलराम जाखड़ के खिलाफ कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया अविश्वास प्रस्ताव लाई।