पटना, 16 अक्तूबर। बिहार में विपक्षी महागठबंधन में 70 विधानसभा सीटों की दावेदार कांग्रेस में टिकट बंटवारे पर विरोध का स्वर फूटने शुरू हो गया है। प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद चंदन बागची ने टिकट बंटवारे की पार्टी आलाकमान से जांच करने और न्याय की अपेक्षा के साथ हाथ जोड़कर कहा है कि अब पार्टी को भगवान ही बचा सकता है.

श्री बागची ने कहा न प्रदेश चुनाव समिति की बैठक हुई और न प्रदेश स्तर पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से विमर्श हुआ और दिल्ली में बैठकर सीटें और टिकट तय हो गया। उन्होंने कहा कि 48 वर्षों से पार्टी से जुड़े हैं। कभी ऐसा नहीं हुआ।मालूम पड़ता है कांग्रेस की सीटें और उम्मीदवार किसी कांग्रेसी ने नहीं तय किया हो। मंत्री और विधायक दल के नेता रहे विजय शंकर दुबे की मांझी सीट पहले ही माले को दे दी गयी। कांग्रेस की सीटों को लेकर संशय की स्थिति बनी रही।

श्री बागची ने कहा कि स्व. ललित नारायण मिश्र के पोते ऋषि मिश्र के दावे की अनदेखी कर जाले से जिसे टिकट दिया गया,उन्हें पार्टी में कभी नहीं देखा।

मालूम हो कि विपक्ष अलीगढ़ विश्वविद्यालय छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष मशकूर अहमद उस्मानी को जाले से कांग्रेस का टिकट देने को मुद्दा बना रहा है।जिन्ना का फोटो लगाने पर उस्मानी विवादों में आये थे।

श्री बागची ने कहा कि इस बार सीट और टिकट सदाकत आश्रम में तय होने की वजाय होटल से आधी रात बाद टिकट बंटा।यह हैरानी की बात है।हमें उम्मीद है पार्टी आलाकमान संग्यान लेगा और दूध का दूध पानी का पानी करेगा।

इधर पार्टी के जानकार प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा के नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाने लगे हैं। उनका कहना है कि कांग्रेस को कमजोर सीटें दी गयी हैं। अपेक्षाकृत वाम दल गठबंधन में फायदे में रहेगा। कांग्रेस को इस बार 50 फीसद का नुकसान तय है।

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