सहरसा विधानसभा क्षेत्र से टिकट के दावेदार,दो बार निर्दलीय चुनाव जीतने का है रिकार्ड

सेवा में,
प्रदेश अध्यक्ष जी।
भारतीय जनता पार्टी, बिहार प्रदेश

महोदय, आपने सहरसा से आलोक जी को पार्टी के उम्मीदवार के रूप में नियुक्ति की है। इसके लिए बधाई, शुभकामनाएं। पूर्व विधायक संजीव जी पारस अस्पताल,पटना में जीवन-मौत की लड़ाई लड़ रहे है। जैसे मुझे पार्टी ने सदैव चुनाव लड़ने के लिए तैयारी करने के लिए कहा वैसे ही संजीव जी भी चुनावी तैयारी कर रहे थे और इधर के दिनों में उनकी भी भागदौड़ बढ़ी और मुझे भी कभी कुछ आपके या किसी स्तर पर नहीं बताया गया।

अध्यक्ष जी.. मैं छात्र-जीवन में संघ का आईटीसी वर्तमान में जिसे प्राथमिक वर्ग प्रशिक्षण कहते हैं, किया था। लेकिन समाजवादी विचार के तरफ ज्यादा झुकाव होने के कारण उस तरफ ही बढ़ा औऱ राजनैतिक क्षेत्र में भी जनता के दुलार-स्नेह के कारण एक सामान्य परिवार से शिक्षक के पुत्र रहकर भी निर्दलीय चुनाव 02 बार जीता। उसवक्त माननीय नीतीश कुमार जी के सरकार बनाने में निःस्वार्थ भाव से जी-जान लगा दिया था। इसबात को माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी स्वीकारते भी रहे हैं, लेकिन माननीय नरेंद्र मोदी जी के व्यक्तित्व और विचारों से प्रभावित होकर तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष श्री मंगल पांडेय जी एवं श्री सुशील कुमार मोदी जी के आग्रह पर मैं 22 अक्टूबर 2014 को भारतीय जनता पार्टी में प्रवेश किया। जबकि उसवक्त भी व्यक्तिगत रूपसे मैं जैसे राष्ट्रीय स्तर पर माननीय नरेंद्र मोदीजी का प्रशंसक रहा, वैसे ही माननीय नीतीश कुमार जी की छवि मेरे लिए सदैव प्रेरणास्रोत रही। पिछले 06 वर्ष से एक कार्यकर्ता के रूप में एकनिष्ठा के साथ संगठन परिवार में कार्य किया। मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि पूरे समय क्षेत्र में जितना समय मैं देता आ रहा हूँ, शायद ही कोई दूसरा सम्पूर्ण देश में दे रहे होंगे। पार्टी ने जब जो कहा, बिना सवाल किए उसको स्वीकार किया। विगत बिहार विधानसभा चुनाव 2015 में भी मैं चुनाव अपने गृहक्षेत्र में लड़ना चाहता था, लेकिन शाहनवानज हुसैन जी के अंतिम समय में इंकार कर दिए जाने पर मुझे दवाब देकर बलि का बकरा बनाकर सुपौल चुनाव लड़ने के लिए भेज दिया गया। नॉमिनेशन के अंतिम दिन से एक दिन पहले मेरे नाम की घोषणा की गयी और अंतिम दिन भागमभाग की अवस्था में नॉमिनेशन किया। स्थानीय कार्यकर्ताओं को अपने व्यक्तिगत परिचय के आधार पर मिलाकर संघर्ष किया था और 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को जितना मत प्राप्त हुआ था उससे तिगुना मत प्राप्त करके सम्मानजनक स्थिति में पार्टी को लेकर आया था। पार्टी ने उसके बाद सदैव कहा आपको चुनाव लड़ाएंगे। लेकिन कोशी क्षेत्र में मात्र 02 सीट लेकर क्षेत्र के सभी कार्यकर्ताओं के जीतोड़ मेहनत का मज़ाक उड़ाया गया।

अध्यक्ष जी, आप चिकित्सक हैं राजनीति क्षेत्र में नहीं रहेंगे तो चिकित्सा करेंगे। कई लोग व्यापारी है, राजनीति नहीं करेगा तो व्यवसाय करेगा। लेकिन मुझ जैसे विशुद्ध राजनीति के लिए बना को आप बतावें क्या करना चाहिए..? जनता की आकांक्षा और दवाब को एकतरफ रखकर घर में बैठ जाना चाहिए..? सहरसा विधानसभा के लिए मैं, संजीव झा, लाजवंती झा, आलोक रंजन, राजीव रंजन साह, नीरज गुप्ता और कार्तिक सिंह ने दावेदारी प्रस्तुत किया। पार्टी ने अपने महिला मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष लाजवंती झा जी को उम्मीदवार चयन पर मुहर लगाया। अंतिम समय में उसे बदलकर लाजवंती झा जी की जगह आलोक रंजन जी को टिकट दे दिया गया। मैं समझता हूँ मेरे साथ अन्याय होने के साथ पारस अस्पताल में भर्ती संजीव झा जी के साथ भी न्याय नहीं हुआ और एक महिला होने के नाते लाजवंती झा को भी अपमानित किया गया।

अध्यक्ष जी, जब आपको टिकट नहीं देना था तो समय रहते इसके विषय में सम्वाद करते। उम्मीदवार नियुक्त करने के पहले और उसके बाद भी भरोसे में लेते। पार्टी ने सभी स्तरों पर चुनाव लड़ाएंगे कहकर, सम्वाद तक करना उचित नहीं समझा। मुझ जैसे वरिष्ठ कार्यकर्ता के मन में यह सवाल उठते रहता है कि वह कौन-सी ताकत है जो जनता के बीच के सर्वेक्षण को बदलकर ऊपर से उम्मीदवार की नियुक्ति करवा देता है? प्रथम वर्ष के प्रशिक्षण के दौरान यही सीखा था कि जाति सदैव गौण होता है। इसके बावजूद मेरी जाति पूछकर टिकट देने या काटने की बात करने वालों की स्वयं के जाति में कितनी पकड़ और पहचान है..?

अध्यक्ष जी अब मुझे पता चल रहा है कि माननीय नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व से प्रभावित होकर सम्पूर्ण देश के अलग-अलग राज्यों में भाजपा की सरकार बनी, लेकिन बिहार में हमारी पार्टी क्यों दिव्यांग अवस्था में पड़ी हुई है! 02 दिन पहले जो राजद से भाजपा में आया है उसे टिकट दे दिया गया। जबकि मैं पिछले 20 दिनों से पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से मिलना और बात करना चाह रहा था। लेकिन किन्हीं के पास बात करने का भी समय नहीं रहा। मुझे माननीय नीतीश कुमार जी व्यक्तिगत रूप से सदैव मानते रहे। उन्होंने कई बार मंचों पर इसको कहा भी है, लेकिन मैं उनके स्नेह को छोड़कर माननीय नरेंद्र मोदी जी के नाम के साथ आया। मैं पार्टी में रहूँ या न रहूँ यह आपको तय करना है।

अध्यक्ष जी, माननीय नरेंद्र मोदीजी के प्रति मेरी आस्था और नीतीश कुमार जी के प्रति स्नेह में कमी नहीं होगी इसका भरोसा मुझे स्वयं पर है। इस परिस्थितियों में मुझे क्या करना चाहिए, एकबार मेरी जगह स्वयं को रखकर सलाह दें।

आपका साथी
किशोर कुमार
पूर्व विधायक, सोनबरसा, सहरसा

प्रतिलिपि : 01. माननीय नागेंद्र जी

  1. माननीय सुशील कुमार मोदी जी
  2. माननीय जे.पी.नड्डा जी
  3. माननीय बी.एल.संतोष जी
  4. माननीय अमित शाह जी
  5. माननीय नरेंद्र मोदीजी

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