अरुण कुमार पाण्डेय

बिहार में “चुनाव, खैरात, जांच एवं उपचार” की प्राथमिकता है. विधानसभा का कार्यकाल 29 नवम्बर को समाप्त होने के पहले हर हाल में चुनाव को लेकर पटना से दिल्ली तक चिंतित है. कोरोना संकट में केन्द्र से अनाज और बिहार से बाढ़ पीड़ितों को नगद खैरात बांटने की सर्वोच्च प्राथमिकता है.

इस बीच कोरोना संक्रमितों और मौत की बढ़ती संख्या ने सुशासन और स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है.अब मानो सरकार सजग हुई है.जांच का दायरा बढ़ाने और उपचार के लिए स्थायी व अस्थायी अस्पतालों में अधिकाधिक बेड बढाने के साथ डाक्टर-नर्सों की तैनाती की मुहिम शुरु हुई है.काश! जांच और उपचार की आज जैसी मुहिम पहले शुरू की जाती.आज बिहार का हर- घर-परिवार के लोग कोरोना से डरे-सहमे हैं.इसका प्रमुख कारण जांच की सुविधा और उपचार की कमी रही है.
प्रखंड स्तर पर हेल्पलाइन बने
मेरी राय में पूरे बिहार में प्रखंड स्तर पर 24 घंटे कोरोना हेल्पलाइन की व्यवस्था होनी चाहिए.डाक्टरों की टीम फोन पर ही कोरोना के कोई भी लक्षण यथा सर्दी, बुखार और सांस लेने में दिक्कत की शिकायत सुन फोन पर ही परामर्श दे कि उसे क्या करना चाहिए,कौन सी दवा लेनी है और कहां और कैसे रहना है.कोरोना केयर केन्द्र और कोविड अस्पताल के साथ हेल्पलाइन की व्यवस्था गंभीर हो रही स्थिति से मुकाबले में सहायक हो सकती है.
खैरात में दवा भी सुलभ हो
आपदा प्रबंधन विभाग को अनाज और नगद खैरात के साथ जरूरतमंदों को पीडीएस दूकानों के माध्यम से दवा भी सुलभ कराने की पहल करनी चाहिए.
संक्रमण और चुनाव
अभी लाख टके का सवाल बना है कि कोरोना संक्रमण के मौजूदा दौर में क्या चुनाव की तैयारी व्यवहारिक और उचित है? स्थिति और भयावह होने पर चुनाव टलने के भी अभी से कयास लग रहे हैं.फिलहाल बिहार उन राज्यों में शामिल हैं जहां मरीज ज्यादा बढ़ रहे हैं.जांच का दायरा बढ़ने यथा आन डिमांड जांच होने पर संक्रमितों की संख्या बढ़ेगी, इसका लाभ होगा कि तत्काल उपचार शुरू होगा और अधिकाधिक लोगों की जान बचेगी.जांच बढ़ने से कोरोना संक्रमण का चेन भी टूटेगा.

मुख्यमंत्री द्वारा तय 20 हजार रोज जांच का लक्ष्य पूरा होते ही इसे 10 हजार और बढ़ाना होगा.चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के लिए आयोग के पास अभी कम से कम एक महीने का समय बचा है.इस बार यह तय कि कोरोना संक्रमण के साये में चुनाव होने पर वोटर की सहभागिता कम होगी.फिलहाल राज्य सरकार की चिकित्सा व्यवस्था लोगों के भरोसे और विश्वास की कसौटी पर खरे उतारने की कठिन चुनौती है.

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