उच्च न्यायालय ने सरकार के 2019 के आदेश को असंवैधानिक ठहराया,7 सितंबर तक सरकार से कोर्ट ने मांगा जवाब


पटना,06 जुलाई. पटना हाईकोर्ट ने आज राज्य के प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षक नियोजन में केवल दो वर्षीय डीएलएड पास अभ्यर्थियों को नियोजित करने के आदेश को भेदभावपूर्ण एवं असंवैधानिक कहा है। बिहार सरकार (शिक्षा विभाग) ने 17 दिसम्बर 2019 को आदेश जारी किया था कि प्राथमिक विद्यालयों (कक्षा एक से पांच तक) के शिक्षक नियोजन में केवल दो वर्षीय डीएलएड पास प्रशिक्षित लोगों को ही नियोजित किया जाएगा। यदि ऐसे लोग नहीं मिले, तब स्नातक शिक्षक अभ्यर्थियों के नियोजन पर विचार किया जाएगा। कोर्ट ने इस आदेश को तत्काल रोक दिया।

शिक्षा विभाग का आदेश : पद खाली रहने पर ही डीएलएड के अलावा दूसरे को मौका

जज की टिप्पणी- ये आदेश भेदभावपूर्ण व संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन

कोर्ट ने इस बारे में 7 सितंबर तक सरकार से जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति डॉ.अनिल कुमार उपाध्याय की एकल पीठ सोमवार को हेमन्त कुमार व अन्य अभ्यर्थियों की तरफ से दायर रिट याचिकाओं की सुनवाई कर रही थी। कोर्ट ने इस आदेश को संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन माना। याचिकाकर्ताओं की तरफ से वरीय अधिवक्ता यदुवंश गिरी ने बहस की। अगली सुनवाई 7 सितम्बर को होगी।

पटना हाईकोर्ट में शिक्षक नियोजन को लेकर कई मामले चल रहे हैं। कई बार सुनवाई भी हो चुकी है। कुछ दिनों पहले दिसंबर 2019 में सीटीईटी पास लोगों को मौका नहीं देने को लेकर भी मामला अदालत में पहुंचा है।

आदेश का असर
हाईकोर्ट का यह आदेश प्राथमिक शिक्षक नियोजन प्राक्रिया में स्नातक पास शिक्षक अभ्यर्थियों को, दो वर्षीय डीएलएड पास अभ्यर्थियों से प्रतिस्पर्धा करने में बराबरी का मौका देगा।


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