2019 के प्रारम्भिक शिक्षक नियोजन प्रक्रिया की अंतिम चयन सूची जारी करने पर हाई कोर्ट ने लगाई रोक

शिवम द्विवेदी की रिपोर्ट

पटना,01 जुलाई . राज्य के प्राइमरी स्कूलों में 94 हजार शिक्षकों की नियुक्ति पर फिर ग्रह लग गया. शिक्षक नियोजन प्रक्रिया को पटना हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. कोर्ट ने राज्य के प्राथमिक विद्यालयों में 94 हजार शिक्षकों की बहाली प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगाते हुए राज्य सरकार से 4 सितंबर तक जवाब तलब किया.
कोर्ट ने राज्य सरकार को यह बताने को कहा है कि विज्ञापन निकालने के बाद क्या नियमों में बदलाव हो सकता है?कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि इस बीच उक्त नियोजन कार्यक्रम की अंतिम चयन सूची को कोई भी नियोजन इकाई जारी नही करेगी .
न्यायाधीश डॉ अनिल कुमार उपाध्याय की एकलपीठ ने नीरज कुमार व अन्य द्वारा दायर रिट याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया.
मालूम हो कि 15 जून से 31 अगस्त तक 94 हज़ार प्रारम्भिक शिक्षकों की नियुक्ति के लिये नियोजन कार्यक्रम निर्धारित किया गया था.
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता दीनू कुमार ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार ने 15 जून,2020 को एक आदेश पारित कर कहा है कि दिसम्बर,2019 में सीटीईटी पास उम्मीदवार इस परीक्षा में भाग नही ले सकते है . कोर्ट को बताया गया कि इस परीक्षा के माध्यम से पूरे राज्य में लगभग 94 हजार शिक्षकों की बहाली की प्रक्रिया चल रही हैं.
यह नियोजन कार्यक्रम वर्ष 2019 का ही है . एनसीटीई से मान्यता प्राप्त संस्थानों से जो सेवारत शिक्षक 18 महीने का डीएलएड कोर्स पास किये थे उन्हें भी इस नियोजन कार्यक्रम में आवेदन देने का अधिकार पटना हाई कोर्ट ने एक रिट याचिका की सुनवाई के बाद दिया था . हाई कोर्ट के उस आदेश के आलोक में शिक्षा बिभाग ने एनसीटीई व सरकार से मन्तव्य लेते हुए नई अधिसूचना जारी की थी. इस अधिसूचना मे 2019 के शिक्षक नियोजन कार्यक्रम में उपरोक्त डीएलएड अभ्यार्थियों सहित दिसम्बर 2019 में उत्तीर्ण हुए संयुक्त टी ई टी अभ्यार्थियों को भी आवेदन देने का मौका सरकार ने 8 जून को दिया था. शिक्षा विभाग ने 15 जून 2020 को निर्गत अपने विभागीय आदेश से यह स्पष्ट किया कि वर्तमान नियोजन कार्यक्रम में सिर्फ उपरोक्त डीएलएड अभ्यार्थियों का ही आवेदन मान्य होगा और दिसम्बर 2019 में उत्तीर्ण हुए संयुक्त टीईटी अभ्यार्थियों को नियोजन कार्यक्रम में शामिल होने का अवसर नही मिलेगा .
याचिकाकर्ताओं ने उक्त 15 जून के आदेश को राज्य सरकार का मनमानापन कहते हुए उसे असंवैधानिक करार कर देने और उसे निरस्त करने की मांग हाई कोर्ट से की है .
कोर्ट ने राज्य सरकार को कहा कि यदि संभव हो तो वह इस मामले में कानूनी संशोधन कर पूरे विवाद को विराम लगा सकती है .
इस मामलें पर अगली सुनवाई 4 सितंबर को होगी.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here