नवादा जिला के रोह प्रखंड अंतर्गत रूपौ में मां चामुंडा देवी शक्तिपीठ मंदिर है . यह मंदिर देश के प्रसिद्ध सिद्ध पीठों में एक है.नवरात्र के दौरान यहां देवी की उपासकों की भारी भीड़ लगती है. जय और यश की कामना प्राप्ति होती है.

किवदंती है कि देवी भगवती का धर इसी स्थान पर गिरा था.लेकिन कुछ पुजारी को कहना है कि शुभ निशुंभ नामक दानव के संग हार के लिए देवी मां ने यही अपना स्वरूप बदला था.इसलिए इस स्थान का नाम रूपा पड़ा है.मार्कंडेय पुराण मैं मां चामुंडा देवी का वर्णन है .कहा गया है कि शुंभ निशुंभ नामक दानवों ने देव लोक में आतंक फैला रखा था . आतंक से मुक्ति के लिए देवी देवताओं ने मां अंबा को भेजा था.असुर शुंभ निशुंभ ने अंबा से युद्ध करने के लिए अपने शिष्य चंड मुंड नामक राक्षस का संघार किया.इसके बाद से ही वह चामुंडा देवी कहीं जाने लगी .चंड मुंड असुरों के वध के बाद उसको मुंडों की माला पहन कर मां चामुंडा देवी ने अपना विकराल रूप बना लिया .अपने शिष्यों के वध से बौखलाए शुंभ निशुंभ दैत्यों ने मां चामुंडा देवी को युद्ध के लिए ललकारा.असुरों का मां चामुंडा देवी के साथ भीषण युद्ध हुआ.जिससे मां चामुंडा ने शुंभ निशुंभ का संहार कर देव लोक असुर को असुर आतंक से मुक्त कराया.चंड मुंड विनाशिनी मां चामुंडा देवी के दरबार में प्रत्येक मंगलवार को दूरदराज श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं . विधि पूर्वक पूजा-पाठ करते हैं.

नवरात्र के दौरान माता की आराधना का विशेष महत्व है.सच्चे ह्रदय से मां चामुंडा देवी की उपासना से जीवन की समस्त बाधाएं कोसों दूर हो जाती है.भक्तों को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है.लाकडाउन में भक्तों के आने की मनाही है.पुजारी द्वारा नियमित रूप से पूजा-अर्चना और आरती की जा रही है.रूपौ के थानाध्यक्ष संतोष कुमार दलबल अक्सर मंदिर की पेट्रोलिंग करने आते हैं.

मंदिर के पुजारी अनिल पांडेय ने बताया कि चामुंडा देवी के दर्शन व पूजन के लिए देश के कोने-कोने से श्रद्धालु लोग पहुंचते हैं . ग्रामीणों व पुजारियों को कहना है कि मंदिर का चौमुखी विकास होना चाहिए. इसकी प्रसिद्धि और के आलोक में मंदिर का विकास अछूता दिख रहा है.इस से एक प्रमुख धार्मिक पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जाना चाहिए.

विधानसभा के आसन्न चुनाव में इस मंदिर का विकास मुद्दा बने.इसस से लोगों की रोजी-रोटी का अवसर सुलभ होगा. प्रायः सभी चुनावों के समय विभिन्न दलों के प्रत्याशी मंदिर में आकर मत्था टेक आशीर्वाद लेते हैं .परंतु इसके अपेक्षित विकास पर ध्यान नहीं दिया . मंदिर के ठीक 4 किलोमीटर स्थित सुम्भा पहाड़ है. वहां पूर्णिमा के दिन काफी भीड़ लगती है.लोग पिकनिक मनाने जाते हैं.

आलेख:महेश मिश्रा

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