कोरोना वायरस के दौरान लागू लॉकडाउन में दिल्ली से उत्तर प्रदेश, बिहार आदि राज्यों में गए कई हजार मजदूरों को लेकर दिल्ली के उप-राज्यपाल अनिल बैजल ने मुख्यमंत्री केजरीवाल को एक पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने पूरे मामले पर चिंता जाहिर की है। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह भी लॉकडाउन के समय हुए पलायन पर केजरीवाल से गहरी चिंता व्यक्त कर चुके हैं।

गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह के उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करने के बाद रविवार शाम पत्र भेजा गया और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल को स्पष्ट निर्देश देने के लिए कहा गया कि किसी भी प्रवासी मजदूर के पलायन को अनुमति नहीं दी जाए।

माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह ने खुद दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल से इसको लेकर बात की।

उत्तर प्रदेश की सीमा तक लोगों को ले जाने के लिए डीटीसी बसों के इस्तेमाल पर गृह सचिव अजय भल्ला ने दिल्ली के मुख्य सचिव को दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को लॉकडाउन लागू करने में चूक के लिए निलंबित करने के लिए कहा है।

मजदूरों के पलायन के बाद केंद्र सरकार ने राज्यों से कहा है कि पलायन करने वाले लोगों को 14 दिनों के लिए अलग रखें और उसके बाद ही उन्हें घर जाने दिया जाए। गृह मंत्रालय के एक अन्य अधिकारी ने कहा कि इसे पूरी तरह से टालना चाहिए था। उन्होंने कहा कि सरकार को चिंता है कि पलायन से देश को बहुत बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।

अधिकारी ने कहा कि दिल्ली सरकार के पास लॉकडाउन लागू कराने की पूरी छूट थी और उनके पास इससे जुड़ी सभी शक्तियां भी थीं। अधिकारी ने कहा कि भविष्य के लिए उप-राज्यपाल अनिल बैजल ने दिल्ली सरकार से कहा है कि वह सभी मजदूरों को सही तरीके से रखें। जरूरत पड़ने पर उन्हें शेल्टर होम में शिफ्ट किया जाए, जहां पर सभी मूलभूत सुविधाएं हों।

इसके अलावा बैजल ने यह भी बताया है कि केंद्र के आदेश के अनुसार, लॉकडाउन के दौरान किसी के भी रुपए न काटे जाएं और पूरा भुगतान किया जाए। वहीं, दिल्ली के मुख्य सचिव विजय देव पहले ही दिल्ली परिवहन निगम को आदेश दे चुके हैं कि लॉकडाउन के दौरान बसों में केवल उन्हीं लोगों को यात्रा करने दिया जाए, जिन्हें 21 दिनों के लॉकडाउन में इजाजत मिली हुई है।

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